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investment Adviser | निवेश सलाहकार से राय लेने में बरतें ये सावधानियां |

| निवेश सलाहकार से राय लेने में बरतें ये सावधानियां |

दिनोंदिन म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या बढ़ रही है. बीते कुछ साल में खुदरा निवेशकों के लिए यह निवेश का पंसदीदा विकल्प बन गया है. आंकड़े भी इसकी बानगी देते हैं.

म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2018 में कुल फोलियो की संख्या में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है. यह बढ़कर 790.31 लाख करोड़ हो गर्इ है. बीते साल के इसी महीने में फोलियो की संख्या 631.65 लाख करोड़ थी.

अक्टूबर, 2018 में ही सिप के जरिए म्यूचुअल फंडों में 7,900 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है. यह बीते साल के मुकाबले 42 फीसदी ज्यादा है. सालाना आधार पर रिटेल सेगमेंट के एयूएम में 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुर्इ है. अक्टूबर में इस सेगमेंट के एयूएम बढ़कर 9,73,676 करोड़ रुपये पर पहुंच गए. अक्टूबर 2017 में ये 8,55,449 के स्तर पर थे.

म्यूचुअल फंडों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच इन्हें गलत तरीके से बेचने का खतरा भी बढ़ा है. आखिरकार म्युचुअल फंड भी तमाम निवेश विकल्पों में से ही एक हैं. अच्छी प्लानिंग के बगैर इनमें निवेश से बहुत मदद नहीं मिलती है.

इसलिए लक्ष्यों की तरह निवेश सलाहकारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है. निवेश करने से पहले जोखिम का आकलन जरूर कर लेना चाहिए.

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निवेश सलाहकारों के साथ डील करने में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. इस मामले में क्या करें और क्या न करें, इस पर सेबी ने सूची जारी की है. इससे जानना और समझ लेना जरूरी है.

आपको क्या करना चाहिए : 

  1. केवल पंजीकृत निवेश सलाहकार से ही राय लें.
  2. सेबी रजिस्ट्रेशन नंबर की जांच करें. सेबी से पंजीकृत निवेश सलाहकारों की सूची उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है.
  3. सुनिश्चित करें कि निवेश सलाहकार के पास मान्य रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट हो.
  4. निवेश सलाहकार को केवल एडवाइजरी फीस का भुगतान करें. एडवाइजरी फीस का भुगतान बैंकिंग चैनल से करें. इस लेनदेन का ब्योरा संभालकर रखें.
  5. लेनदेन में पूरी सतर्कता बरतें.
  6. उनसे अपनी सभी शर्तों को लिखित रूप से देने के लिए कहें. इन शर्तों को ध्यान से पढ़ लें.

क्या नहीं करें :

  1. बिना रजिस्ट्रेशन वाले निवेश सलाहकारों से संपर्क न करें.
  2. निवेश सलाह की आड़ में स्टॉक टिप्स के झांसे में न आएं.
  3. इंवेस्टमेंट एडवाइजर को निवेश के लिए अपना पैसा नहीं दें
  4. अगर एडवाइजर अनाप-शनाप रिटर्न या सुनिश्चित रिटर्न का वादा करता है, तो उस झांसे में न आएं.
  5. केवल फोन कॉल या संदेशों के आधार पर कोर्इ लेनदेन नहीं करें.
  6. सीमित समय के लिए डिस्काउंट या अन्य किसी तोहफे के चक्कर में न आएं.

कौन होता है इंवेस्टमेंट एडवाइजर? 

निवेश सलाहकार या इवेस्टमेंट एडवाइजर को सेबी के साथ पंजीकरण कराने की जरूरत होती है. बतौर निवेश सलाहकार किसी को केवल निवेश की सलाह देने की अनुमति है. वह सेवाओं के वितरण और निष्पादन का काम नहीं कर सकता है. निवेश सलाहकार एक तय फीस ले सकते हैं. यह निवेशक और उनके बीच आपस में तय कोर्इ भी रकम हो सकती है.

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निवेश सलाहकार म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटरों से कैसे हैं अलग?

म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटरों को एसोसिएशन आफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के साथ रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है. ये अपने म्यूचुअल फंड क्लाइंट को बुनियादी सलाह दे सकते हैं. उनकी सलाह उस स्कीम तक सीमित रहती है जिसका वितरण वे करते हैं.(source:economictimes.indiatimes.com)

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