“Profitability Index – Learn How to Calculate the Profitability”

PI RATIO (पीर्इ रेशियो):-

“Benefit file (PI), otherwise called benefit venture proportion (PIR) and esteem speculation proportion (VIR), is the proportion of result to speculation of a proposed undertaking.”

एक व्यापारी हैं. उनके पास दो दुकानें खरीदने का विकल्प है. एक दुकान में एक लाख रुपये लगाकर वह एक हजार रुपये कमा सकते हैं. जबकि दूसरी में एक लाख रुपये ही लगाकर वह 500 रुपये कमाएंगे. उन्हें अपना पैसा कहां लगाना चाहिए? लाजिमी है कि इसका जवाब होगा पहली दुकान में.

ठीक यही बात शेयरों को खरीदने में भी लागू होती है. किसी शेयर से एक रुपये कमाने के लिए आप उसमें कितना निवेश करेंगे, यह उसके पीर्इ रेशियो से पता चलता है.

इसका इस्तेमाल किसी शेयर की वैल्यू का पता लगाने के लिए किया जाता है. यह बताता है कि कोर्इ शेयर कितना सस्ता या महंगा है. इस तरह पीर्इ रेशियो की मदद से शेयर की सही कीमत का अंदाजा लगाया जा सकता है. यह किसी शेयर की कीमत और प्रति शेयर आय (ईपीएस) का अनुपात है. शेयरों के वैल्यूएशन निकालने के लिए टेक्निकल एनालिस्ट इस अनुपात का खूब इस्तेमाल करते हैं.

कैसे निकालते हैं पीई रेशियो?

प्रति शेयर आय को शेयर बाजार की भाषा में ईपीएस कहते हैं. इसका मतलब अर्निंग प्रति शेयर है. किसी कंपनी के मुनाफे में उसके कुल शेयरों की संख्या से भाग देने पर ईपीएस निकलता है. इसके बाद बाजार में शेयर की कीमत में ईपीएस से भाग देने पर पीई रेशियो आ जाता है. आइए, इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं.

मान लेते हैं कि किसी कंपनी के शेयर की कीमत 100 रुपये है और प्रति शेयर अर्निंग यानी ईपीएस 10 रुपये है. इस तरह शेयर की कीमत यानी 100 को ईपीएस यानी 10 रुपये से भाग देने पर पीर्इ रेशियो मिल जाएगा. यहां पीर्इ रेशियो 10 आएगा.

यह है पीर्इ रेशियो को निकालने का फॉर्मूला: पीर्इ रेशियो = शेयर का बाजार भाव/र्इपीएस

बदलता रहता है पीई रेशियो

किसी कंपनी का पीई रेशियो स्थिर नहीं रहता है. यह हमेशा बदलता रहता है. किसी कंपनी की प्रति शेयर आय बढ़ या घट सकती है. इसी तरह शेयर का बाजार भाव भी घटता-बढ़ता रहता है. इस वजह से रेशियो घटता-बढ़ता रहता है. यानी आज किसी कंपनी का पीई रेशियो 20 है. तो, इसका मतलब यह नहीं है कि यह हमेशा 20 ही रहेगा.

किसी कंपनी के ज्यादा पीर्इ रेशियो का मतलब हो सकता है कि निवेशक उसमें ज्यादा बढ़ोतरी की संभावनाएं देख रहे हैं. इस रेशियो की अपनी सीमाएं भी हैं. मसलन जिन कंपनी को मुनाफा नहीं हुआ है यानी नुकसान में हैं, उनका पीर्इ रेशियो नहीं निकल पाएगा.

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अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों के पीई रेशियो की तुलना नहीं हो सकती

अगर आप दो कंपियों के पीर्इ रेशियो की तुलना करते हैं तो आपको यह ध्यान रखना होगा कि दोनों एक ही सेक्टर की कंपनियां हो. यानी बैंकिंग सेक्टर की कंपनियों के पीर्इ रेशियो की तुलना आटो सेक्टर की कंपनियों से नहीं की जा सकती है. अगर आप ऐसा करते हैं तो यह सेब की तुलना संतरे से करने जैसा है. आम तौर पर अच्छी बुनियाद और ग्रोथ वाली कंपनियों के शेयरों का पीई रेशियो ज्यादा होता है.

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पीई रेशियो का यह भी मतलब है कि आप किसी कंपनी के शेयर को खरीदने के लिए उसकी प्रति शेयर आय (ईपीएस) की तुलना में कई गुना कीमत चुकाने को तैयार हैं. इसका मतलब यह है कि अगर किसी कंपनी के शेयर का ईपीएस 100 और इसका पीई 10 है तो आप इस शेयर को खरीदने के लिए ईपीएस की 10 गुनी कीमत चुका रहे हैं.

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