The crucial 7 years: Financial mistakes you should avoid |(वित्तीय फैसले लेने में ये 7 गलतियां करने से बचें)|

Avoid making these 7 mistakes in taking financial decisions(वित्तीय फैसले लेने में ये 7 गलतियां करने से बचें)

“The crucial 7 years: Financial mistakes you should avoid … up to make flawedfinancial decisions because you didn’t teach them”

सही वित्तीय फैसला लेना आसान नहीं है. इसमें काफी सोच-विचार की जरूरत पड़ती है. हड़बड़ी में किए गए वित्तीय फैसले अक्सर हमें नुकसान पहुंचाते हैं. अमूमन इस बात पर तो चर्चा होती है कि कैसे सही वित्तीय फैसले लें. लेकिन, इस पर कम ही बात की जाती है कि किन गलतियों को करने से बचें. यहां हम इसी तरह की 7 चीजों पर बात कर रहे हैं, जिनसे बचने की कोशिश आपको करनी चाहिए.

 

1. निवेश की शुरुआत जल्दी न करना वैल्यू रिसर्च के सीर्इओ धीरेंद्र कुमार कहते हैं कि निवेश में हीला हवाली करना सही नहीं है. जिस दिन से आप नौकरी की शुरुआत करते हैं, उसी दिन से बचत का सिलसिला शुरू हो जाना चाहिए. बचत भले छोटी रकम से शुरू करें, लेकिन करें जरूर.

2. इंतजार करते रहना निवेश की शुरुआत जल्दी करने से आपके पैसों को बढ़ने का मौका मिलता है. बैंक एफडी जैसे डेट निवेश के मामले में चक्रवृद्धि ब्याज का फायदा मिलता है. वहीं, इक्विटी निवेश में जितने ज्यादा समय तक आप शेयर को होल्ड करते हैं, उतना ज्यादा रिटर्न मिलने के आसार होते हैं.

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3. इमर्जेंसी फंड न बनाना जिस दिन से नौकरी शुरू करते हैं, उसी दिन से बचत की शुरुआत कर देनी चाहिए. नियमित आमदनी होने पर एक तय राशि बचाना आसान हो जाता है. यह इमर्जेंसी में काम आती है.

4. फिक्स्ड इनकम पर बहुत निर्भरता फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट को सुरक्षित निवेश माना जाता है. इनसे मिलने वाले रिटर्न कम अस्थिर होते हैं. इक्विटी के मुकाबले इनमें कम जोखिम होता है. हालांकि, नहीं कह सकते कि ये रिस्क फ्री होते हैं. इनके साथ महंगार्इ का जोखिम है. यह निवेश के असली मूल्य को कम कर देती है. इसलिए पोर्टफोलियो में सभी प्रकार के निवेश विकल्प होने चाहिए. ये विविधता प्रदान करते हैं. इससे जोखिम भी कम होता है

5. इंश्योरेंस को निवेश समझना इंश्योरेंस का मतलब यह नहीं कि आपने निवेश भी कर दिया है. कुमार कहते हैं, “अपने और परिवार के लिए इंश्योरेंस एक लक्ष्य है. इसे दूसरों से अलग रखना चाहिए.” निवेश करना पैसा जुटाना है. इसकी मदद से लंबी और छोटी अवधि के लक्ष्यों को हासिल किया जाता है. वहीं, इंश्योरेंस एक तरह की सुरक्षा है. यह मेडिकल या किसी अन्य अप्रिय स्थिति में काम आता है. दोनों के उद्देश्यों में अंतर है.

6. लुभावनी स्कीमों पर भरोसा करना कभी भी इस तरह की स्कीमों के जाल में न फंसें जिनके रिटर्न पर यकीन न हो रहा हो. अलबत्ता इस तरह की लुभावनी स्कीमों से दूरी बनानी चाहिए. फाइनेंशियल प्लानर सूर्य भाटिया कहते हैं, “निवेशकों में भेढ़ चाल की मानसिकता होती है. वे तेजी में आक्रामक और नरमी में बिल्कुल ठंडे हो जाते हैं.” यदि लोग किसी एक खास निवेश विकल्प में पैसा लगाने में जुटे हों तो आंख मूंदकर यकीन नहीं करें.

7. भविष्य की इनकम खर्च करने से बचें इन दिनों आसानी से कर्ज मिल जाता है. इसके चलते हम भविष्य की बचत से इस लोन को भरना शुरू कर देते हैं. सीमा के अंदर ही खर्च करें. किस्त पर मिल रहे हर आइटम को खरीद लेने की प्रवृत्ति सही नहीं है. खुद से पूछें कि क्या वाकर्इ में आपको उसकी जरूरत है. क्या आप बाद में उसे नहीं खरीद सकते हैं.

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