Types Of Share (शेयर के प्रकार) :

Types Of Shares (शेयर के प्रकार) :

शेयर दो प्रकार के होते है –

  1. प्रेफरेन्स शेयर
  2. इक्विटी शेयर

प्रेफरेन्स शेयर पर लाभांश की दर तय होती है । कम्पनी के बंद हो जाने की स्थिति में लाभांश और मूलधन की वापसी पर इन शेयरों का अधिकार इक्विटी शेयरों से पहले होता है ।

कई बार मुनाफा न होने पर कम्पनी प्रेफरेन्स शेयरहोल्डरों को लाभांश नहीं दे पाती । ऐसे हालात से बचने के लिए कम्पनियाँ क्युमुलेटिव प्रेफरेन्स शेयर जारी करती हैं । इन शेयरों पर बकाया लाभांश खत्म होने की बजाए इकट्ठा होता रहता है , और जब कम्पनी के पास पैसे होते हैं तो पिछला सारा बकायमा लाभांश चुका दिया जाता है । तब तक इक्विटी शेयर पर कोई लाभांश नहीं दिया जाता ।

अतः प्रेफरेन्स शेयरहोल्डरों को कम्पनी के घाटे या मुनाफे की परवाह किये बिना अपने तय लाभांश का हमेशा लाभ रहता है ।

जब तक कम्पनी चलती रहती है तब तक शेयरहोल्डरों को उनका शेयर कैपिटल वापिस नहीं किया जाता । यह नियम केवल एक श्रेणी के शेयरों पर लागू नहीं होता – ‘ रिडीमेबल प्रेफरेन्स शेयर ‘ । इन शेयरों का मूलधन एक तय अवधि पूरी होने पर शेयरहोल्डर को चुका दिया जाता है ।

दूसरी ओर इक्विटी शेयरों पर तय लाभांश की गारँटी नहीं होती । बल्कि इन शेयरों पर किसी भी लाभांश के मिलने की कोई गारंटी नहीं होती है । इक्विटी शेयरहोल्डरों को कम्पनी का मालिक माना जाता है । अतः सभी लेनदारों और प्रेफरेन्स शेयरहोल्डरों की बकाया राशि चुकाने पर कम्पनी के पास जो मुनाफा और एकत्रित राशि बचती है , केवल उसी पर ही इक्विटी शेयरहोल्डरों का अधिकार बनता है ।

आमतौर पर इक्विटी शेयरहोल्डर कम्पनी के कुल शेयरहोल्डरों का एक बड़ा हिस्सा होते हैं । वे कम्पनी के सभी मामलों में सम्पूर्ण मत का अधिकार रखते हैं । कम्पनी को अच्छा मुनाफा होने पर उसका सबसे बड़ा भाग इन्हीं शेयरहोल्डरों को जाता है । कम्पनी को नुकसान होने पर उसका भार भी इन्हीं पर पड़ता है – और उन्हें कम या शून्य लाभांश मिलता है ।

इक्विटी शेयरों का असली लाभ यह है कि कम्पनी की तरक्की और बढत का सबसे ज्यादा फायदा इन्हीं पर मिलता है । प्रेफरेन्स शेयरों पर जहाँ लाभांश पहले से तय होता है , वहीं इक्विटी शेयरों पर मुनाफे के साथ लाभांश भी बढ़ता जाता है । साथ ही कम्पनी की बढ़त होने पर इक्विटी शेयर की कीमत शेयर बाजार में बढ़ जाती है – प्रेफरेन्स शेयर पर ऐसा नहीं होता । इक्विटी शेयरहोल्डर को समय समय पर कम्पनी से ‘ राईट ‘ और ‘ बोनस शेयर भी मिलते हैं ।

अतः इक्विटी शेयरों पर ज्यादा खतरा , और उसी के हिसाब से ज्यादा नफा या नुक्सान बना रहता है । इसलिए शेयरों में निवेश करने का असल लाभ इन्हीं शेयरों में मिलता है ।

source:(s s grawal)

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