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What are futures and options?

What are futures and options?

“Prospects choices can be a generally safe approach to approach the fates markets. Numerous new brokers begin by exchanging prospects choices rather than straight fates contracts. There is less hazard and instability when purchasing choices contrasted and prospects contracts. Numerous expert merchants just exchange choices. Before you can exchange prospects choices.”

# A future is a right and an obligation to buy or sell an underlying stock at a predetermined price and deliverable at a predetermined time. Options are a right without an obligation to buy or sell an equity or index. A call option is a right to buy while a put option is a right to sell.

 

फ्यूचर्स ‘ ( Futures ) व ‘ ऑप्शन्स ‘ ( Options ):

भारत में ‘ फ्यूचर्स कारोबार पारम्परिक बदला प्रणाली के समाप्त हो जाने के बाद वर्ष 2001 में शुरू हुआ । फ्यूचर्स ‘ व ‘ ऑप्शन्स ‘ अनुभवी व्यापारियों व सट्टेबाजों का काम है । हम आम निवेशकों को इससे दूर रहने की सलाह देंगे । पर आइए , हम आपको संक्षेप में इनके बारे में समझाने चलते हैं.

Important Terms :

  • Buyer
  • Seller
  • Price
  • Expiry

Futures (फ्यूचर्स ) :

 

आप अपने शेयर दलाल के कार्यालय में फ्यूचर्स व ऑप्शन्स कारोबार के लिए एक अलग कम्प्यूटर देखेंगे । भारत में नकद बाजार को सट्टा ( फ्यूचर्स ) बाजार से अलग रखा गया है । नकद बाजार में आप जिस दिन सौदा करते हैं , उसी दिन आपको रकम चुका कर शेयरों की डिलिवरी लेनी पड़ती है । इसी तरह , अगर शेयर बेचते हैं तो आप उसी दिन शेयरों की डिलिवरी देकर अपना पैसा लेते हैं । पर फ्यूचर्स बाजार में केवल सौदे में हुए लाभ या नुक्सान का नकद भुगतान किया जाता है.

# Future’ is a contract to buy or sell the underlying asset for a specific price at a predetermined time. If you buy a futures contract, it means that you promise to pay the price of the asset at a specified time. If you sell a future, you effectively make a promise to transfer the asset to the buyer of the future at a specified price at a particular time. Every futures contract has the following features.

फ्यूचर्स बाजार में केवल कुछ चुनिंदा शेयरों का ही कारोबार किया जाता है । इन शेयरों का चयन एक्सचेंज द्वारा उनकी उपलब्ध मात्रा , मार्केट कैपिटलाईजेशन व खरीदे या बेचे गए शेयरों की संख्या के आधार पर किया जाता है । इन चुने हुए शेयरों की एक तय संख्या को मिलाकर एक ‘ कॉन्ट्रैक्ट बनता है । उदाहरण के लिए , मान लीजिए फ्यूचर्स बाजार में MARUTI में शेयरों की संख्या 1000 तय की गई है । तब फ्यूचर्स बाजार में व्यापारी 1000 या उससे गुणा किसी संख्या में ही MARUTI शेयर फ्यूचर्स खरीद और बेच सकते हैं.

फ्यूचर्स बाजार में आपको खरीदे गए शेयरों के पैसे नहीं देने पड़ते । आप केवल ‘ मार्जिन मनी ‘ अदा करते हैं , जो आपके खरीदे गए शेयरों के कुल मूल्य का 10 से 20 प्रतिशत हो सकता है । विभिन्न कॉन्ट्रैक्टों का मार्जिन मनी समय – समय पर एक्सचेंज द्वारा तय किया जाता है.

वर्तमान में भारतीय बाजारों में एक ,दो या तीन महीने के लिए को खरीदे जा सकते है,जिसे आप Contract KI ABdhi End होने से पहले कभी भी Squire Off कर शकते । अगर आप ऐसा नहीं करते तो कोर की अवधि में आखिरी दिन (प्रायः Month का आखिरी गुरुवार) बाजार बंद होने के भाव पर एक्सर आपका कॉन्टैक्ट समाप्त कर देता है.

फ्यूचर्स कारोबार शेयर व्यापारियों के लिए बहुत आकर्षक माना जाता है , क्योंकि आज के परिवेश में एक हजार अथवा एक लाख रुपये का मार्जिन मनी चुका कर व्यापारी उससे कई गुणा मूल्य के शेयर खरीद सकते हैं । पर यह दो – धारी तलवार है , जिसमें अधिक लाभ के चक्कर में भारी नुक्सान भी झेलना पड़ सकता है । अगर आप फ्यूचर्स में अपना हाथ आजमाना चाहते हैं तो ‘ टॉप लॉस ऑर्डर ‘ का प्रयोग करें जिससे आपको कम – से – कम नुक्सान हो । पर इसके बावजूद फ्यूचर्स बाजार में कई व्यापारी बहुत रुपया Loss Kr बैठते हैं.

Options (ऑप्शन्स) :

 

# Options contracts are instruments that give the holder of the instrument the right to buy or sell the underlying asset at a predetermined price. An option can be a ‘call’ option or a ‘put’ option

ऑप्शन्स भी एक प्रकार का फ्यूचर्स कारोबार है । जब आप किसी कॉन्टैक्ट पर ऑप्शन्स खरीदते हैं तो आप कान्ट्रैक्ट की अवधि समाप्त होने से पहले उसे किसी भी ऐसे दाम पर खरीदने या बेचने के अधिकार के लिए एक प्रीमियम चुकाते हैं जिस दाम से आपको लाभ हो या आपको नुक्सान कम-से-कम हो.अगर आप कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त करने के इस ऑप्शन , यानि विकल्प का प्रयोग नहीं करते , तो ज्यादा से – ज्यादा आपको उस प्रीमियम का नुक्सान होगा जो आपने ऑप्शन खरीदने के लिए चुकाया था.अतः फ्यूचर्स की अपेक्षा ऑप्शन्स अधिक संरक्षित है क्योंकि फ्यूचर्स में नुक्सान की कोई सीमा नहीं होती.

ऑप्शन्स सौदे के एक ओर इसे खरीदने वाला व्यक्ति होता है तो दूसरी और ‘ ऑप्शन राईटर ‘ । सिद्धांतिक रूप से देखें तो ऑप्शन्स ‘ खरीदने वाले व्यक्ति की देयता केवल प्रीमियम तक सीमित होती है , जबकि ऑप्शन राईटर की देयता की कोई सीमा नहीं होती ।

source : s grewal

Futures and Options
Futures and Options

Types Of Options (ऑप्शन्स मूलतः दो प्रकार के होते हैं.)

 

  1. Call Options
  2. Putt Options
  • जो लोग शेयर बाजार , या जिस शेयर को वे खरीदना चाहते है उस शेयर में तेजी की उम्मीद रखते हैं वे आमतौर पर कॉल ऑप्शन खरीदते हैं।
  • दूसरी ओर,मंदी की उम्मीद रखने वाले लोग पुट ऑप्शन खरीदते हैं।

ऑप्शन कारोबार बहुत जटिल होता है जिसमें बहुत अनुभव की आवश्यकता होती है । शेयर बाजार में नए निवेशकों को इससे दूर रहने की सलाह देंगे ।

 

Differences  B/w Futures & Options
  1. A futures contract is an agreement binding on the counter parties for buying and selling of a financial security at a predetermined price at a specific date in the future. On the other hand, an Options Contract allows the investor the right but not the obligation to exercise buying or selling of a financial instrument on or before the date of expiry.
  2. Since futures contract is binding on the parties, the contract has to be honored on the predecided date and the buyer is locked into the contract. Subsequently, an option contract provides just the option but no obligation for buying or selling of the security.
  3. For securing a futures contract, apart from the commission amount paid no advance payments are considered as compared to an options contract which makes it essential to make a premium payment. This is done for the purpose of locking the commitment made by the parties.
  4. The execution of the futures contract can only be done on the predecided date and as per the conditions which have been mentioned. Options contract requires the performance to be done at any time prior to the date of expiry.
  5. A futures contract can have no limits amounts of profits/losses to the counter parties whereas options contract have unlimited profits with a cap on the number of losses.
  6. No factor of time decay is important in futures contract since the contract is definitely going to be executed. Whether an option contract will be executed will be much clearer while coming closer to the date of expiry,

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अगर आपके मन में अभी भी कोई सवाल है तो आप नीचे कमेंट करके पूछ सकते है और अपने विचार की प्रतिक्रया भी कमेंट में लिख सकते है,पोस्ट पूरा पढने के लिए आपका धन्यवाद.

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