Why would a company buyback its own shares?

शेयरों में बाय – बैक ‘ ( Buyback ) :

A buyback enables organizations to put resources into themselves. Lessening the quantity of offers exceptional available expands the extent of offers claimed by financial specialists.

शेयरों में ‘ बाय– बैक ‘ उस स्थिति को कहते हैं जब कम्पनी अपनी पूंजी से अपने ही शेयर वापस खरीदती है ।

इससे कम्पनी का इक्विटी कैपिटल कम हो जाता है , क्योंकि बाजार से वापस खरीदे गए शेयर खारिज हो जाते हैं । कम्पनी ऐक्ट के नियमों के अनुसार इन शेयरों को दोबारा जारी नहीं किया जा सकता । अतः कम्पनी का इक्विटी कैपिटल कम होने के साथ बाजार में उपलब्ध कम्पनी के शेयर भी कम हो जाते हैं । इससे प्रति शेयर आमदनी ( ई पी एस ) बढ़ जाती है , क्योंकि उतना ही शुद्ध लाभ अब पहले से कम इक्विटी कैपिटल पर विभाजित होता है । नतीजा यह कि बाजारों में कम्पनी के शेयर को बेहतर पी / ई मिलता है और शेयर का दाम बाय बैक से पहले के दाम से बहुत बढ़ जाता है ।

अक्सर बाय – बैक इस बात का संकेत होता है कि कम्पनी मानती है । कि बाजारों में उसके शेयर को अपने उचित मूल्य से कम भाव मिल रहा है । मैनेजमेन्ट द्वारा अपने शेयरों में इस प्रकार के विश्वास प्रदर्शन से भी शेयरों के भाव चढ़ जाते हैं ।

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कई बार मैनेजमेन्ट अपनी कम्पनी में सार्वजनिक स्वामित्व कम करने के लिए भी शेयर वापस खरीदती है । यह स्टॉक एक्सचेंज से शेयर को डी – लिस्ट करने , यानि एक्सचेंज की सूची से शेयर को हटाने की दिशा में एक कदम है ।

किसी कम्पनी के शेयरों में बाय – बैक का दाम अक्सर बाजार में चालू भाव से अधिक , और कई बार बहुत अधिक होता है । इससे निवेशकों को प्रायः असाधारण लाभ होता है जो उन्हें साधारण स्थिति में न मिलता ।

इससे कंपनी को कैसे फायदा होता है?

आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या घटने से फाइनैंशल रेशो बेहतर होगा। सबसे पहले, रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई) और अर्निंग/शेयर (ईपीएस) बढ़ता है, जिससे पी/ई सुधरता है। बायबैक से बैलेंस शीट से कैश घटता है और ऐसेट्स बढ़ता है। नतीजतन, इससे रिटर्न ऑन ऐसेट्स (आरओए) में इजाफा होता है।

इन्वेस्टर्स के लिए इसके क्या मायने हैं?

बायबैक से कंपनी सरप्लस कैश से मौजूदा शेयरहोल्डर्स से शेयर खरीदती है, जिससे स्टॉक्स प्राइस को सपोर्ट मिलता है। अगर कंपनी बायबैक को लेकर सीरियस होती है, तो शेयरहोल्डर्स का रिटर्न बढ़ जाता है।

सेबी ने हाल में क्या बदलाव किए हैं?

बायबैक प्रविजन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सेबी ने कुछ प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कंपनी जितने शेयर बायबैक करने का ऐलान करेगी, उसका कम से कम 50 फीसदी उसे खरीदना होगा। वहीं, इसके लिए कम ये कम 25 फीसदी अमाउंट एस्क्रो अकाउंट में रखना होगा। सेबी ने बायबैक के लिए टाइम फ्रेम 12 महीने से घटाकर 3 महीने कर दिया है।

source:(s s grawal)

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